भारतीय राजव्यवस्था क्विज़-2

भारतीय राजव्यवस्था क्विज़-2

भारतीय राजव्यवस्था क्विज़-1

भारतीय राजव्यवस्था क्विज़-1

Puzzle क्विज़-2

प्रिय स्टूडेंट,

नीचे दी गयी PUZZLE को हल करके, अपने उत्तर Comments में लिखें। सही उत्तर Sunday (10.09.2017) को इसी पेज पर प्रकाशित किए जायेंगे।

All the Best.
टीम SelectionPakka.com
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एक दल में पांच व्यक्ति हैं – P, Q, R, S और T दल में एक चिकित्सक, एक वकील और एक कलाकार है। P और S अविवाहित विद्यार्थी हैं। T एक पुरूष है जिसका विवाह दल के एक सदस्य के साथ हुआ है। Q, P का भाई है और वह न तो चिकित्सक है, न ही कलाकार। R चिकित्सक नहीं है।

Q1: चिकित्सक कौन है?
T
P
Q
R

Q2: कलाकार कौन है?
P
Q
R
T

Q3: R का पति कौन है?
P
T
S
Q

Q4: वकील कौन है?
P
Q
R
S

Q5: निम्नलिखित में से कौन निश्चित रूप से पुरूष है?
P
S
Q
उपर्युक्त में से कोई नहीं

सही उत्तर: Q1: T , Q2: R, Q3: T, Q4: Q, Q5: Q

सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (General Anti Avoidance Rules (GAAR))

सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (गार) टैक्स की जांच करने के लिए टैक्स से बचाव विरोधी नियमों का एक समूह है जिन का उल्लेख सबसे पहले प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता (Direct Tax Code) 2010 में किया गया था परंतु कुछ क्षेत्रों से हुए विरोध के कारण इसे स्थगित कर एक समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष पार्थसारथी शोम थे। ये नियम 1 अप्रैल 2017 को लागू किए गए। Continue reading “सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (General Anti Avoidance Rules (GAAR))”

UPSC सिविल सर्विस प्रीलिम्स क्विज़-1

यूपीएससी Quiz-1


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भारत में पाए जाने वाले गंभीर रूप से लुप्तप्राय जानवर : Critically endangered animals found in India

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) द्वारा जारी किए गए रेड डाटा बुक के मुताबिक एक जानवर को “गंभीर रूप से लुप्तप्राय” घोषित तब किया जाता है जब यह निम्न मानदंडों में से किसी एक को पूरा करता है: Continue reading “भारत में पाए जाने वाले गंभीर रूप से लुप्तप्राय जानवर : Critically endangered animals found in India”

दिवालियापन बोर्ड : Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)

भारतीय दिवालियापन बोर्ड (इबीबीआई) की स्थापना दिवालियापन संहिता, 2016 के प्रावधानों के तहत की गई है। इस अधिनियम में आईबीबीआई को कई कार्यों के साथ एक रेफरी संस्थान का रूप दिया गया है जिसमें व्यवसायों के दिवालियापन से संबन्धित एजेंसियों और पेशेवरों के नियमों और नियंत्रणों को बनाना व उन्हें लागू करना शामिल हैं। Continue reading “दिवालियापन बोर्ड : Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)”

भारत के संविधान में उल्लेखित मौलिक कर्तव्य : Fundamental duties in the Constitution of India

भारत के संविधान में दिये गए मौलिक कर्तव्य कुछ नैतिक और नागरिक कर्तव्यों का एक समूह हैं जो भारत के प्रत्येक नागरिक पर लागू होते हैं। मौलिक कर्तव्यों पर अध्याय 51A मूल संविधान का हिस्सा नहीं था, इसे सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा 1976 में संविधान में सम्मिलित किया गया था। भारत के संविधान में मौलिक कर्तव्यों को सम्मिलित करने का विचार पूर्वी सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित है। मूलभूत कर्तव्यों का पालन करने के लिए न्यायालय किसी नागरिक को बाध्य नहीं कर सकता। हालांकि, हर नागरिक को मौलिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। भारत के संविधान में सूचीबद्ध मूलभूत कर्तव्यों को नीचे दिया गया है: Continue reading “भारत के संविधान में उल्लेखित मौलिक कर्तव्य : Fundamental duties in the Constitution of India”

The Kannada flag, et cetera द हिंदू संपादकीय का सार : The Hindu Daily Editorial Summary 22-July-2017

The Kannada flag, et cetera कन्नड़ ध्वज, इत्यादि

  • भारत की अन्य भाषाओं पर हिंदी प्रभुत्व की बढ़ते हुई घटनाओं से चिंतित कई गैर हिंदी-भाषी राज्यों के निवासी अपना असंतोष विभिन्न से प्रकट कर रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक सरकार के अपने झंडा होने की वैधता पर विचार करने का निर्णय ऐसी घटनाओं में से एक है।
  • कन्नड़ पहचान और अपने क्षेत्र की एकता के प्रतीक के रूप में विभिन्न उद्देश्यों के लिए झंडे का इस्तेमाल कर्नाटक के इतिहास में कई बार किया गया है। यह संघीय भारत के ढांचे का एक हिस्सा बन गया है। बेंगलुरु मेट्रो में हिंदी के संकेतों के इस्तेमाल की घटना और हिंदी को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के प्रयासों ने केवल आग में घी डालने का काम किया है।
  • अलगाव के इस डर को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए –

क) इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चाओं को बढ़ावा देने के ज़रिये भाषायी सह-अस्तित्व का माहौल बनाना चाहिए।

ख) अन्य भाषाओं के लिए सम्मान की भावना लोगों के बीच पैदा होनी चाहिए और वे जिस राज्य / क्षेत्र में रह रहे हैं, उसकी भाषा को उन्हें सिखाने की पहल को बढ़ावा देना चाहिए।

ग) सरकार और लोगों दोनों को मिल-जुलकार भाषायी विविधता बनाये रखने के लिए कदम उठाने होंगे ताकि भारत का हर नागरिक इसे खुशी से स्वीकार करे जो कि बदले में भारत को एक जीवंत संघ का रूप देगा।

  • The growing incidents of Hindi dominance over other languages of India are compelling residents of other non Hindi speaking States to show their resentment in many ways. The recent incident of Karnataka Government’s decision to look into the legality of having its own flag is one of many such incidents.
  • Flags have been used many a time in the history of Karnataka for different purposes as a symbol of Kannada identity and unity of the region. It has become a part of the framework of a federal India and incidents like the use of Hindi signs in Bengaluru metro and the Central Government’s efforts to promote Hindi have only added fuel to fire.
  • What needs to be done allay this fear of alienation –

a) creating an environment of linguistic coexistence by promoting public discussions on the issue

b) Feeling of respect for other languages to be inculcated among people and learning the language of the State/region they are living in should be promoted and

c) the Government and people both have to come together to make linguistic diversity be cherished by everybody which in turn would make India a living federation.

Digital Trade Games : द हिंदू संपादकीय का सार : The Hindu Daily Editorial Summary 22-July-2017

Digital trade games डिजिटल व्यापार खेल

  • कॉरपोरेट्स और देशों के बीच वैश्विक व्यापार सम्मेलनों में ई-कॉमर्स ने एक बहुत महत्वपूर्ण विषय के रूप में जगह बना ली है। लेकिन यह शब्द (term) अभी तक पूरी तरह से इन सौदों पर बातचीत करने वाले लोगों द्वारा समझा नहीं गया है, जिससे आसेयान (ASEAN) देशों के बीच प्रस्तावित आरसीईपी (RCEP) संधि जैसे बैठकों में समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • डिजिटल इंटेलिजेंस ना कि डेटा (आंकड़े) – यह समझने की जरूरत है कि डेटा आज सिर्फ डेटा नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल इंटेलिजेंस बन चुका है। बैंकिंग, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि से संबंधित आंकड़े सिर्फ जानकारी के एक टुकड़े से कहीं ज़्यादा है जिसे आसानी से एक देश से दूसरे देश में स्वतंत्र रूप से जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भविष्य में, जिसके पास ये डेटा समूह (Data intelligence clusters) होंगे, वह वैश्विक व्यापार का वास्तविक शासक बन जाएगा। डिजिटल इंटेलिजेंस कुछ केंद्रों जैसे कॉरपोरेट दिग्गज के पास ही इकट्ठा रहता है, इससे यह और भी अधिक गंभीर चिंता का विषय बना जाता है।
  • भारत को क्या करना चाहिए?

1) एक व्यापक डिजिटल औद्योगीकरण नीति का ढाँचा तैयार करना चाहिए।

2) उस डेटा पर नज़र रखनी चाहिए जिसे भारत से दुनिया के दूसरे हिस्सों तक जाने की अनुमति है।

3) घरेलू डिजिटल रूपरेखा (हमारे घरेलू बाजार के आंकडों से संबन्धित) को मजबूत किया जाना चाहिए और अन्य देशों में इसके अप्रतिबंधित प्रवाह को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए ताकि इसे बाहर से नियंत्रित नहीं किया जा सके।

4) डिजिटल डेटा व्यापार में विशेषज्ञों द्वारा वार्ता (बातचीत) सावधानी से संभाली जानी चाहिए ताकि हम तकनीकी दिग्गजों से अतिरंजित (overpowered) न हों।

  • E- commerce has acquired a huge place in global business conferences between corporates and countries alike. But the term is not yet totally understood that well by the people negotiating these deals which might pose a problem in meetings such as the proposed RCEP treaty between ASEAN countries.

Digital intelligence and not data – What needs to be understood is that data is not just data today, rather it is digital intelligence. Data related to banking, defence, health, education, etc. is much more than just a piece of information which cannot be allowed to flow freely from one country to another. In future, the one who possesses these data intelligence clusters will become the actual ruler of global business and trade. The fact that digital intelligence remains concentrated to a few centers such as a few corporate giants makes this an even more serious concern.

  • What India needs to do?

1) Frame a comprehensive digital industrialization policy,

2) Keep a track of the data that is allowed to move from India to other parts of the world.

3) Domestic digital framework (the data that we possess from our domestic market) must be strengthened and not allowed to flow unrestricted to other countries so that it doesn’t end up being controlled from outside

4) Negotiations in digital data trade must be handled carefully by experts so that we do not get overpowered by the technical giants.