The Kannada flag, et cetera द हिंदू संपादकीय का सार : The Hindu Daily Editorial Summary 22-July-2017

The Kannada flag, et cetera कन्नड़ ध्वज, इत्यादि

  • भारत की अन्य भाषाओं पर हिंदी प्रभुत्व की बढ़ते हुई घटनाओं से चिंतित कई गैर हिंदी-भाषी राज्यों के निवासी अपना असंतोष विभिन्न से प्रकट कर रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक सरकार के अपने झंडा होने की वैधता पर विचार करने का निर्णय ऐसी घटनाओं में से एक है।
  • कन्नड़ पहचान और अपने क्षेत्र की एकता के प्रतीक के रूप में विभिन्न उद्देश्यों के लिए झंडे का इस्तेमाल कर्नाटक के इतिहास में कई बार किया गया है। यह संघीय भारत के ढांचे का एक हिस्सा बन गया है। बेंगलुरु मेट्रो में हिंदी के संकेतों के इस्तेमाल की घटना और हिंदी को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के प्रयासों ने केवल आग में घी डालने का काम किया है।
  • अलगाव के इस डर को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए –

क) इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चाओं को बढ़ावा देने के ज़रिये भाषायी सह-अस्तित्व का माहौल बनाना चाहिए।

ख) अन्य भाषाओं के लिए सम्मान की भावना लोगों के बीच पैदा होनी चाहिए और वे जिस राज्य / क्षेत्र में रह रहे हैं, उसकी भाषा को उन्हें सिखाने की पहल को बढ़ावा देना चाहिए।

ग) सरकार और लोगों दोनों को मिल-जुलकार भाषायी विविधता बनाये रखने के लिए कदम उठाने होंगे ताकि भारत का हर नागरिक इसे खुशी से स्वीकार करे जो कि बदले में भारत को एक जीवंत संघ का रूप देगा।

  • The growing incidents of Hindi dominance over other languages of India are compelling residents of other non Hindi speaking States to show their resentment in many ways. The recent incident of Karnataka Government’s decision to look into the legality of having its own flag is one of many such incidents.
  • Flags have been used many a time in the history of Karnataka for different purposes as a symbol of Kannada identity and unity of the region. It has become a part of the framework of a federal India and incidents like the use of Hindi signs in Bengaluru metro and the Central Government’s efforts to promote Hindi have only added fuel to fire.
  • What needs to be done allay this fear of alienation –

a) creating an environment of linguistic coexistence by promoting public discussions on the issue

b) Feeling of respect for other languages to be inculcated among people and learning the language of the State/region they are living in should be promoted and

c) the Government and people both have to come together to make linguistic diversity be cherished by everybody which in turn would make India a living federation.

Digital Trade Games : द हिंदू संपादकीय का सार : The Hindu Daily Editorial Summary 22-July-2017

Digital trade games डिजिटल व्यापार खेल

  • कॉरपोरेट्स और देशों के बीच वैश्विक व्यापार सम्मेलनों में ई-कॉमर्स ने एक बहुत महत्वपूर्ण विषय के रूप में जगह बना ली है। लेकिन यह शब्द (term) अभी तक पूरी तरह से इन सौदों पर बातचीत करने वाले लोगों द्वारा समझा नहीं गया है, जिससे आसेयान (ASEAN) देशों के बीच प्रस्तावित आरसीईपी (RCEP) संधि जैसे बैठकों में समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • डिजिटल इंटेलिजेंस ना कि डेटा (आंकड़े) – यह समझने की जरूरत है कि डेटा आज सिर्फ डेटा नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल इंटेलिजेंस बन चुका है। बैंकिंग, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि से संबंधित आंकड़े सिर्फ जानकारी के एक टुकड़े से कहीं ज़्यादा है जिसे आसानी से एक देश से दूसरे देश में स्वतंत्र रूप से जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भविष्य में, जिसके पास ये डेटा समूह (Data intelligence clusters) होंगे, वह वैश्विक व्यापार का वास्तविक शासक बन जाएगा। डिजिटल इंटेलिजेंस कुछ केंद्रों जैसे कॉरपोरेट दिग्गज के पास ही इकट्ठा रहता है, इससे यह और भी अधिक गंभीर चिंता का विषय बना जाता है।
  • भारत को क्या करना चाहिए?

1) एक व्यापक डिजिटल औद्योगीकरण नीति का ढाँचा तैयार करना चाहिए।

2) उस डेटा पर नज़र रखनी चाहिए जिसे भारत से दुनिया के दूसरे हिस्सों तक जाने की अनुमति है।

3) घरेलू डिजिटल रूपरेखा (हमारे घरेलू बाजार के आंकडों से संबन्धित) को मजबूत किया जाना चाहिए और अन्य देशों में इसके अप्रतिबंधित प्रवाह को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए ताकि इसे बाहर से नियंत्रित नहीं किया जा सके।

4) डिजिटल डेटा व्यापार में विशेषज्ञों द्वारा वार्ता (बातचीत) सावधानी से संभाली जानी चाहिए ताकि हम तकनीकी दिग्गजों से अतिरंजित (overpowered) न हों।

  • E- commerce has acquired a huge place in global business conferences between corporates and countries alike. But the term is not yet totally understood that well by the people negotiating these deals which might pose a problem in meetings such as the proposed RCEP treaty between ASEAN countries.

Digital intelligence and not data – What needs to be understood is that data is not just data today, rather it is digital intelligence. Data related to banking, defence, health, education, etc. is much more than just a piece of information which cannot be allowed to flow freely from one country to another. In future, the one who possesses these data intelligence clusters will become the actual ruler of global business and trade. The fact that digital intelligence remains concentrated to a few centers such as a few corporate giants makes this an even more serious concern.

  • What India needs to do?

1) Frame a comprehensive digital industrialization policy,

2) Keep a track of the data that is allowed to move from India to other parts of the world.

3) Domestic digital framework (the data that we possess from our domestic market) must be strengthened and not allowed to flow unrestricted to other countries so that it doesn’t end up being controlled from outside

4) Negotiations in digital data trade must be handled carefully by experts so that we do not get overpowered by the technical giants.

H1N1 Returns : द हिंदू संपादकीय का सार : The Hindu Daily Editorial Summary 22-July-2017

H1N1 returns : एच1एन1 की वापसी

  • एच1 एन1 क्या है? – एच1 एन1 एक वायरस का नाम है जो मानव इन्फ्लूएंजा नामक बीमारी का कारक बनता है। एच1 एन1 फ्लू को स्वाइन फ्लू भी कहा जाता है जो कि एक श्वसन रोग है। इसमें हैमग्लूटीनिन (Haemagglutinin) नामित ग्लाइकोप्रोटीन (Glycoprotein) होता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को समूह बनाने के लिए मजबूर करता है और वायरस को संक्रमित सेल से बांधता है। यदि समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो यह रोग घातक साबित हो सकता है।
  • इसके बारे में चिंता क्यों हो? – एच1 एन1 फ्लू कई वर्षों से भारत में बहुत सी मौतों का कारण बना है। यह गर्मियों के मौसम में हर साल पुनरावृत्ति करता है। इस साल अब तक 12500 लोग संक्रमित चुके हैं, जिनमें से 600 की इस साल मृत्यु हो चुकी है। महाराष्ट्र सभी राज्यों में सबसे ज्यादा प्रभावित है।
  • दोनों वायरस नस्लों अर्थात् कैलिफोर्निया और मिशिगन के उपभेदों में परिवर्तन नहीं हुआ है। इसलिए, उनका इलाज उनसेल्टामवीर (Oseltamivir) नामक दवा के साथ किया जा सकता है जिसे अब तक उपयोग किया गया है।
  • क्या किये जाने की आवश्यकता है?

क) इन्फ्लूएंजा प्रतिरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करनी चाहिए

ख) स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण जो संक्रमित रोगियों के संपर्क में आते हैं

ग) सरकार द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम

घ) शहरों, कस्बों और गांवों में हर सरकारी अस्पताल में निदान और उपचार सुविधाएं

ड़) संक्रमित लोगों की संख्या के बारे में आंकड़ों का संग्रह बनाना चाहिए जिसमें ऐसे मामले जहां इलाज सफल रहा और जहां मृत्यु हुई जैसे सारे मामलों का रिकॉर्ड हो ताकि भविष्य में इस बीमारी से निपटने के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सके

  • What is H1N1? – H1N1 is the name of a virus which causes human influenza. H1N1 flu is also known as swine flu which is a respiratory disease. It contains the glycoprotein named Haemagglutinin which causes red blood cells to form a cluster and binds the virus to the infected cell. If not treated in time, the disease could prove to be fatal.
  • Why worry about it? – The H1N1 flu has been responsible for causing many deaths in India for many years now. It recurs every year in the summer season. So far, 12500 people have been infected of which 600 have died this year. Maharashtra is the worst affected of all the states
  • Both virus strains namely the California and Michigan strains have not undergone mutation. So, they can be treated with the same drug named Oseltamivir which has been used until now.
  • What needs to be done?
  1. Framing a national policy for influenza immunization
  2. Vaccination of health workers who come in contact with infected patients
  3. Awareness programs to be organized by the Government
  4. Diagnosis and treatment facilities at every Government hospital in cities, towns and villages
  5. Collection of data regarding the number of infected people, cases where treatment was successful and number of deaths so that better strategies to deal with this disease are made in future.

द हिंदू संपादकीय का सार : Gist of the Hindu editorial dated 21-July-2017

Should urbanization score over conservation? क्या शहरीकरण संरक्षण से अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए?

  • प्राचीन स्मारकों और पुरातत्व स्थलों और अवशेष (एएमएएसआर) अधिनियम, 1988 में प्रस्तावित संशोधनों में से एक संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के भीतर किसी भी निर्माण को प्रतिबंधित करने वाले प्रावधान में बदलाव करने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव के बारे में यह लेख अलग-अलग विचार प्रस्तुत करता है।
  • पहला विचार यह है कि प्रस्तावित संशोधन राजनीति से प्रेरित हैं क्योंकि कैबिनेट के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए नोट में आगरा में अकबर के मकबरे, बेंगलुरु के टीपू सुल्तान के महल और पाटण में रानी की वाव से संबंधित केवल तीन उदाहरण हैं, जो कि मौजूदा कानून में बदलाव करने के लिए सरकार को मजबूर कर रहे हैं। इस नोट में पुरातत्व विभाग की मंजूरी या पुरातत्व के केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड का भी कोई ज़िक्र नहीं है जो कि इसे संदेह के दायरे में लाता है।
  • दूसरा विचार यह है कि 100 मीटर के भीतर निर्माण पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। निर्माण से संबंधित मामलों को नौकरशाही पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए जैसा कि वर्तमान में किया जाता है। इस उद्देश्य के लिए प्रत्येक शहर में शहरी आर्ट्स कमीशन की स्थापना की जानी चाहिए। नए निर्माणों के साथ स्मारकों के संरक्षण से संबंधित विचारों का विभिन्न शहरों के बीच आदान-प्रदान किया जाना चाहिए। एक समग्र व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिसमें सरकार और साथ ही सिविल सोसाइटी संगठन जैसे इंटैक (INTACH) को इन मामलों को आपसी सामंजस्य से संभालना चाहिए।
  • एक और विचार यह है कि 100 मीटर सीमा कानून जारी रहनी चाहिए अन्यथा यह बेईमान अधिकारियों और उसके कर्मचारियों को स्मारकों को दाँव पर रख के अवैध लाभ के लिए नियमों को तोड़ने की और भी अधिक छूट देगा जैसा कि कई बार देखा गया है।

Decolonizing the Curriculum पाठ्यक्रम को उपनिवेशवाद रहित बनाना

  • वर्तमान समय में भारत में उदारवादी कला के स्तर में गिरावट आई है। यह चिंता का विषय है क्योंकि संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए एक उभरते उदार कला वातावरण की आवश्यकता होती है।
  • सोच को उपनिवेशवाद रहित करना (decolonization) – हमारे स्कूलों की इतिहास की किताबें और सामान्य शैक्षिक व्याख्यान अँग्रेजी धारणाओं द्वारा काफी हद तक प्रभावित हैं जैसे कि आर्यन आक्रमणकारियों और ब्राह्मण उपनिवेशवादी धारणाएं जो कि असत्य हैं।
  • शिक्षा का उपनिवेशवाद रहित करना (decolonization) – ब्रिटिश भारतीयों को अच्छी तरह से प्रशिक्षित मशीन बनाना चाहते थे। परिणामस्वरूप उस समय की शिक्षा नीति अब भी जारी है जिसने रटने को पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया है और स्वतंत्र अनुसंधान के महत्व को कम कर दिया है ।
  • हमारी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए उदार कलाओं liberal arts को अँग्रेजी सोच से आज़ाद कराने और अनुसंधान करने का वातावरण बनाने की आवश्यकता है। यह सब करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक नीति में इन सभी विषयों को शामिल करना होगा।

Gains in translation अनुवाद से लाभ

  • भाषाई विविधता को कम करने के मुद्दे पर सरकार की उदासीनता चिंताजनक है। सरकार के इस रवैये के कारण भाषाएं तेजी से मर रही हैं। यह स्थिति इस बात से स्पष्ट होती है कि 2011 की जनगणना में एकत्रित भाषा के आंकड़े अभी भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
  • भाषाएं क्यों महत्वपूर्ण हैं?

क) वे मानव विविधता बढ़ाती हैं जो कि मनुष्य के विकास के लिए उसी प्रकार महत्वपूर्ण है जिस तरह जैव विविधता पर्यावरण के लिए।

ख) किसी भाषा को खोने से एक समुदाय विभिन्न प्रयोजनों के लिए विस्थापन करता है जिसे भाषा प्रवास के रूप में जाना जाता है। लोग शिक्षा प्राप्त करने और अपने अन्य कार्यों के लिए अन्य जगहों पर जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं जो कि उनके विकास में बाधा उत्पन्न करता है।

ग) स्कूल छोड़ने वाले कई बच्चे उन समुदायों से होते हैं जिनकी भाषा शिक्षा के लिए मान्यता प्राप्त नहीं है।

घ) किसी की अपनी भाषा में सीखना वैज्ञानिक रूप से किसी के संज्ञानात्मक और भावनात्मक संकायों के पूर्ण विकास के लिए सहायक माना जाता है।

  • सभी भाषाओं को उचित मान्यता देने की आवश्यकता है, भाषाओं से संबंधित आंकड़ों के संग्रह के लिए एक तंत्र तैयार किया जाना चाहिए, इसे सार्वजनिक करना चाहिए है और इसे विशेष रूप से शिक्षा के माध्यम से भाषा संरक्षण के लिए नीतियां बनाने के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।

Should urbanization score over conservation?

  • The proposed amendments to the Ancient monuments and Archaeological Sites and Remains (AMASR) Act, 1958 propose to relax the provision which prohibits any construction within 100 meters of a protected monument. There are different views regarding this proposal.
  • The first view is that the proposed amendments are politically motivated as the note prepared by the Ministry of Culture for the cabinet considers only three instances concerned with Akbar’s Tomb in Agra, Tipu Sultan’s palace in Bengaluru and Rani ki Vav in Patan enough for making changes in the existing law. The said note doesn’t talk about ASI clearance or the Central Advisory Board of Archaeology which brings it into suspicion.
  • The second view is that there should be no absolute ban on construction within 100 m of the protected monument. The matters related to construction should not be left to bureaucracy as is done in the present. An Urban Arts Commission should be established in every city for this purpose. Ideas related to protection of monuments along with new construction should be exchanged between different cities. A holistic system should be made in which Government as well as civil society organizations like INTACH should constructively handle these matters.
  • Another view is that the 100 m boundary should continue as part of the law otherwise it will give unscrupulous authorities and its staff more space to subvert rules for illicit gains as noticed in many instances keeping the protection of the monuments at stake.

Decolonizing the Curriculum

  • There is a downward trend in the level of liberal arts in India in the present times. This is a matter of concern as conservation of culture and heritage needs a blooming liberal arts environment.
  • Colonization of thought – Our school level history texts and academic discourses in general have been influenced to a great extent by colonial perceptions on an issues such as the texts on Aryan invaders and Brahman colonizers, which are nothing but false.
  • Colonization of Education – the British wanted to make Indians mere well-trained machines and as a result the education policy of those times has continued since then remaining content with making rote learning an essential part of the curriculum and giving no space for though provoking research.
  • The need is to decolonize liberal arts and inculcate a habit of research to preserve our cultural heritage and the National Educational Policy must incorporate all this to put it into action.

Gains in Translation

  • The apathy of the Government towards the issue diminishing linguistic diversity is alarming. Languages are increasingly dying because of this attitude of the Government. Such a state of affairs is evident from the fact that the language data collected in the 2011 census have still not been made public.
  • Why are languages important?
  1. They add to the diversity among humans just like biodiversity which is necessary for human development.
  2. Losing a language makes a community migrate for different purposes which is known as language migration. The people are forced to move to other places to get education and all their other works done in an alien language hindering their development.
  3. Many of the school dropouts belong to the community whose language isn’t recognized for education.
  4. Learning in one’s own language is scientifically considered to aid full development of one’s cognitive and emotive faculties.
  • The need is to give proper recognition to all the languages, put in place a mechanism for collection of data related to languages, put it in public domain and use it to make policies for language conservation especially through education.